12 Jyotirlinga images with name and place

ज्योतिर्लिंग एक प्रकाश स्तम्भ है जिसका आकर अनंत है। इसकी कोई सीमा नहीं है। शिवलिंग स्वयंभू है इसका अर्थ है की ये अपने आप प्रकट हुआ है इसे बनाया नहीं गया है।
आइये जानते हैं की ज्योतिर्लिंग कैसे प्रकट हुआ।

ज्योतिर्लिंग कैसे प्रकट हुआ

शिवपुराण के अनुसार एक बार ब्रह्माजी और विष्णु जी के बीच विवाद हो गया की दोनों में सर्वश्रेष्ठ कौन है। दोनों में से कोई भी अपने आपको कम मानने को तैयार नहीं थे तभी वहाँ पर भोलेनाथ शिव शंकर एक प्रकाश स्तम्भ के रूप में प्रकट हुए उसी प्रकाश स्तम्भ को ही हम ज्योतिर्लिंग कहते हैं।

महादेव ने एक शर्त रखी।

आप दोनों में से जो भी इस प्रकाश रुपी स्तम्भ (ज्योतिर्लिंग) का छोर सबसे पहले खोज लेगा वही सर्वश्रेष्ठ होगा।

दोनों लोग अलग अलग दिशा में ज्योतिर्लिंग का छोर खोजन के लिए निकल पड़े बहुत वर्ष बीत गए लेकिन दोनों में से किसी को भी छोर नहीं मिला। विष्णु जी भी हार मानकर वापस आ गए।

तभी ब्रह्मा जी को युक्ति सूझी और उन्होंने निर्णय लिया की वो झूठ बोल देंगे की उन्हें ज्योतिर्लिंग का छोर मिल गया है और प्रमाण देने के लिए उन्होंने केतकी फूल को साथ ले लिए। केतकी को भी बहला फुसला करके अपने पक्ष में कर लिया।

जब दोनों लोग शिव जी के पास पहुंचे तो भोलेनाथ ने विष्णु भगवान् से पूछा कि क्या आपने ज्योतिर्लिंग का अंत पा लिया है इस पर विष्णु जी ने कहा कि मै इसका अंत पाने में असमर्थ रहा हूँ। इसके बाद शिव जी ने ब्रह्मदेव से पूछा की क्या आपको इस ज्योतिर्लिंग का छोर मिला – ब्रह्मदेव ने झूठ बोलते हुए कहा की उन्होंने इसका छोर पा लिया और प्रमाण के लिए केतकी को भी साथ लाएं हैं जब महादेव ने केतकी से ब्रह्मदेव की बात सत्यापित करने को कहा तो उन्होंने भी यही कहा की हाँ! ब्रह्मदेव ने ज्योतिर्लिंग का छोर पा लिया है।

ब्रह्मदेव और केतकी को श्राप

ये बात सुनकर महादेव क्रोधित हो गए और उन्होंने ब्रह्मदेव को श्राप दिया की आज के बाद आपकी तीनो लोकों में कहीं भी पूजा नहीं होगी। केतकी को श्राप दिया कि तुम सुगन्धित होने के बावजूद भी कभी भी मेरी पूजा में अर्पण के लिए काम नहीं आओगी ।

विष्णु जी के सत्य वचन सुनकर महादेव ने विष्णु जी को आशीर्वाद दिया कि आप मेरे भी पूज्यनीय रहोगे और आपकी तीनो लोकों में पूजा होगी।

द्वादश ज्योतिर्लिंग स्त्रोतम

सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।
उज्जयिन्यां महाकालमोङ्कारममलेश्वरम्॥

परल्यां वैद्यनाथम् च डाकिन्यां भीमशङ्करम्।
सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने॥

वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे।
हिमालये तु केदारं घुश्मेशं च शिवालये॥

एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायं प्रातः पठेन्नरः।
सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति॥

एतेषां दर्शनादेव पातकं नैव तिष्ठति।
कर्मक्षयो भवेत्तस्य यस्य तुष्टो महेश्वराः॥

ऐसा कहा जाता है की इस ब्रह्माण्ड में 64 ज्योतिर्लिंग हैं लेकिन अभी तक 12 ज्योतिर्लिंग की खोज हुयी है। सभी 12 ज्योतिर्लिंग में देवों के देव महादेव ने स्वयं जाकर के ज्योतिर्लिंग स्थापित कए हैं। हर ज्योतिर्लिंग के स्थापित होने के पीछे एक कहानी है।

12 ज्योतिर्लिंग कुछ इस प्रकार हैं

  1. सोमनाथ ज्योतिर्लिंग
  2. मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग
  3. महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग
  4. ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग
  5. वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग
  6. भीमशंकरम ज्योतिर्लिंग
  7. रामेश्वर ज्योतिर्लिंग
  8. नागेश्वर ज्योतिर्लिंग
  9. विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग
  10. त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग
  11. केदारनाथ ज्योतिर्लिंग
  12. घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग(Somnath Jyotirlinga)

Somnath jyotirlinga

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग गुजरात राज्य के सौराष्ट्र प्रान्त में स्थित है । ये ज्योतिर्लिंग स्वयं चंद्रदेव ने स्थापित करवाया था। ये सबसे पहला ज्योतिर्लिंग है ।

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के प्रमाण ऋग्वेद भागवत और शिवपुराण में पाए जाते हैं।

इस ज्योतिर्लिंग को बहुत बार मुगलो द्वारा गिराया गया और इसे 17 बार नवनिर्माण किया गया ।

Nearest Railway Station from Somnath Temple – Veravel Junction which is 6Km from the temple.

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मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग(Mallikarjuna Jyotirlinga)

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग आँध्रप्रदेश के श्रीशैल पर्वत में विराजमान है। इसी पर्वत के पास से ही कृष्णा नदी बहती है।

इस मंदिर को दक्षिण का कैलाश भी कहते हैं।
यहाँ पर ज्योतिर्लिंग के साथ साथ शक्ति पीठ भी मौजूद है। यहाँ पर दर्शन के लिए महाशिवरात्रि का दिन बहुत ही शुभ माना गया है।

The nearest Railway station from Mallikarjun Jyotirlinga is Markarpur Road(MRK) which is 90KM from the temple.

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग(Mahakaleshwar Jyotirlinga)

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्यप्रदेश राज्य के उज्जैन जिले में स्थित है। इस ज्योतिर्लिंग के पास में ही शिप्रा नदी बहती है। मंदिर बहुत ही सुन्दर है।

यहाँ पर भस्म आरती होती है ।
यहाँ आने वाले सभी भक्तो को काल से मुक्ति मिलती है। यह दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है बाकी सभी ज्योतिर्लिंग का मुख पूर्व दिशा की ओर है।

The nearest Railway station from Mahakaleshwar Jyotirlinga is Ujjain Junction(UJN) which is 1.5KM from the temple.

ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग(Omkareshwar Jyotirlinga)

ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग नर्मदा नदी के किनारे मान्धाता टापू में स्थित है जो मध्यप्रदेश के खांडवा जिले में आता है।

यहाँ पर दर्शन के लिए महाशिवरात्रि का दिन बहुत ही शुभ माना गया है।

The nearest Railway station from Omkareshwar Jyotirlinga is Omkareshwar Road Railway station(OM) which is 12KM from the temple, But only passenger train runs from Dr. Ambedkarnagar to Omkareshwar Road.

Instead You can visit from Ujjain Junction(UJN) and take cab/taxi from Ujjain to Omkareshwar.  

वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग(Baidyanath Jyotirlinga)

वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग देवघर झारखण्ड में स्थित है। देवघर मतलब देवताओं का स्थान।
वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग को वैद्यनाथ धाम भी कहते हैं

यहाँ पर लोग शिवरात्रि में तो जाते ही हैं लेकिन इस ज्योतिर्लिंग में सावन के महीने में कावण यात्रा के लिए बहुत से श्रद्धालु आते हैं।
यहाँ पर भी शक्ति पीठ स्थापित है।

इस ज्योतिर्लिंग के बारे में उसके स्थान को लेकर के कुछ मतभेद हैं। कुछ लोग मानते हैं की महाराष्ट्र में हैं और कुछ लोगो का मानना हैं कि बैजनाथ धाम हिमाचल प्रदेश में हैं। अगले लेख में हम इसे विस्तार से जानेंगे।

The nearest Railway station from Baidyanath Jyotirlinga is Baidyanathdham(BDME) Deoghar Railway station which is 1.5KM from the temple.

भीमशंकरम ज्योतिर्लिंग(Bhimshankaram Jyotirlinga)

भीमशंकर ज्योतिर्लिंग भोरगिरि गाँव में स्थित हैं जो कि पुणे( महाराष्ट्र) से 125 किमी दूर हैं। इसके पास में भीम नदी बहती हैं जो बाद में कृष्णा नदी से मिल जाती हैं।

यहाँ पर एक पहाड़ हैं जिसे हम सह्याद्रि या पश्चिमी घाट कहते हैं ।

जहाँ पर भीमशंकर ज्योतिर्लिंग हैं उस स्थान को वन्यजीव अभ्यारण्य(Wildlife Sanctuary) बना दिया गया हैं।

The nearest Railway station from Bhimshankar Jyotirlinga is Talegaon(TGN) Railway station which is 94KM from the temple and an Asansol junction which is 172 KM.

रामेश्वर ज्योतिर्लिंग(Rameshwar Jyotirlinga)

रामनाथ या रामेश्वर या रामेश्वरम – ये तीनो नाम हैं इस ज्योतिर्लिंग के । यह ज्योतिर्लिंग तमिलनाडु के रामेश्वरम टापू में स्थित हैं ।

The nearest Railway station from Rameshwar Jyotirlinga is Rameshwaram(RMM) Railway station which is 1.3KM from the temple.

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग(Nageshwar jyotirlinga)

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग गुजरात के दारूकावन में स्थित हैं। गोमती और द्वारका नदी के तट में स्थित ये ज्योतिर्लिंग बहुत ही सुन्दर हैं।

ऐसा लोगो का मानना हैं कि नागेश्वर ज्योतिर्लिंग में दर्शन करने से सभी प्रकार के विष हमारे जीवन काल से ख़त्म हो जाते हैं।

The nearest Railway station from Nageshwar Jyotirlinga is Dwarka(DWK) Railway station which is 16KM from the temple.

विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग(Vishwanath Jyotirlinga)

विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग काशी नगरी उत्तरप्रदेश में गंगा के किनारे स्थित हैं । इस नगरी को आजा बनारस या वाराणसी भी कहते हैं। पुराणों में ऐसा कहा गया हैं कि ये स्वयं भोलेनाथ के द्वारा बसाई गयी नगरी हैं।

इस ज्योतिर्लिंग को विश्वेश्वर के नाम से भी जानते हैं।

जो भी मनुष्य काशी में अपने प्राण त्यागता हैं उसे मोक्ष मिलता हैं। विश्वनाथ बाबा के दर्शन करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।

The nearest Railway station from Vishwanath Jyotirlinga is Varanasi(BSB) Junction which is 4.5KM from the temple.

त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग(Triyambkeshwar jyotirlinga)

त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग त्रिम्बक में स्थित हैं जो कि नासिक से 28 किमी दूर हैं। इसी स्थान से गोदावरी नदी निकलती हैं। त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग तीन पहाड़ो से घिरा हुआ हैं , ब्रह्मगिरि , नीलगिरि, कलागिरि।

यहाँ पर पूरी मंदिर काले पत्थर से बानी हुयी हैं।

त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग के तीन मुख हैं जो ब्रह्मा विष्णु और महेश को दर्शाते हैं।

The nearest Railway station from Triyambkeshwar Jyotirlinga is Nashik Road(NK) Railway Station which is 37KM from the temple.

केदारनाथ ज्योतिर्लिंग(Kedarnath Jyotirlinga)

केदारनाथ ज्योतिर्लिंग उत्तराखंड में गढ़वाल हिमालय में स्थित हैं जिसकी समुद्र से ऊंचाई 3500मी हैं। केदारनाथ ज्योतिर्लिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में सबसे ऊंचाई पर स्थित हैं।

यहाँ पर मन्दाकिनी नदी बहती हैं।

इस ज्योतिर्लिंग को स्वर्ग का द्वार भी कहते हैं।
यहाँ पर पंच केदार स्थित हैं जिसमे केदारनाथ ज्योतिर्लिंग पहला केदार है।

The nearest Railway station from Kedarnath Jyotirlinga is Yog and Rishikesh(YNRK) Railway Station which is 210KM from the temple.

घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग(Ghushmeshwar Jyotirlinga)

घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के दौलताबाद के निकट एल्लोरा में स्थित है। यह ज्योतिर्लिंग और ज्योतिर्लिंग से छोटा है।
घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग को घृष्णेश्वर या कुसुमेश्वर ज्योतिर्लिंग भी कहा जाता है ।

The nearest Railway station from Ghusmeshwar Jyotirlinga is Daulatabad Railway station which is 17KM from the temple and an Aurangabad Railway Station which is 30 KM.

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